हरितालिका तीज 2026: जानें सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त
हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरितालिका तीज का व्रत रखा जाता है. यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए रखती हैं. इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष विधान है. महिलाएं निर्जला रहकर ये व्रत करती हैं, जिसमें पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती. अगले दिन सुबह स्नान करने के बाद ही व्रत खोला जाता है. 2026 में हरितालिका तीज कब पड़ रही है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, आइए विस्तार से जानते हैं.
हरितालिका तीज 2026 की सही तारीख
2026 में हरितालिका तीज का पावन पर्व मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा. यह दिन महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि वे अपने सुहाग की लंबी आयु के लिए यह कठिन व्रत रखती हैं.
पूजा का शुभ समय और मुहूर्त
हरितालिका तीज की पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय प्रदोष काल माना जाता है. यह वह समय होता है जब दिन ढलने लगता है और रात शुरू होने वाली होती है.
- हरितालिका तीज 2026 की तिथि: भाद्रपद, शुक्ल पक्ष, तृतीया
- तिथि प्रारंभ: 10 अगस्त 2026, सोमवार को शाम 07:35 बजे से
- तिथि समाप्त: 11 अगस्त 2026, मंगलवार को शाम 05:45 बजे तक
- मुख्य पूजा का दिन: 11 अगस्त 2026, मंगलवार
हरितालिका तीज 2026 पर पूजा का शुभ मुहूर्त:
- प्रदोष काल: 11 अगस्त 2026, मंगलवार को शाम 06:55 बजे से रात 09:05 बजे तक.
- शुभ चौघड़िया मुहूर्त:
- सुबह का शुभ मुहूर्त: सुबह 09:30 बजे से सुबह 11:00 बजे तक
- शाम का शुभ मुहूर्त: शाम 04:30 बजे से शाम 06:00 बजे तक
महिलाएं इन शुभ मुहूर्तों में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करके अपने व्रत को पूर्ण कर सकती हैं.
हरितालिका तीज का महत्व
यह व्रत अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए इस व्रत को बहुत कठोर तरीके से किया था. उन्होंने अन्न-जल त्यागकर, घने जंगल में जाकर भगवान शिव की तपस्या की थी. माता पार्वती के इस कठोर तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. तभी से महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए इस व्रत को रखती हैं.
पूजा की विधि
- सुबह की तैयारी: व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं. इसके बाद, वे संकल्प लें कि वे निर्जला व्रत रखेंगी.
- शंकर-पार्वती की प्रतिमा: एक चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें. आप चाहें तो मिट्टी से भी प्रतिमा बना सकती हैं.
- श्रृंगार सामग्री: माता पार्वती को सोलह श्रृंगार का सामान जैसे चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, काजल, आलता, पायल, बिछिया, गजरा, कंघा, शीशा, फल, फूल, इत्र, पाउडर, मेहंदी आदि अर्पित करें.
- बेलपत्र, फूल और फल: भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल और फल अर्पित करें.
- मंत्र जाप: भगवान शिव और माता पार्वती के मंत्रों का जाप करें. "ॐ नमः शिवाय" और "ॐ गौरी नमः" का जाप बहुत शुभ माना जाता है.
- कथा श्रवण: हरितालिका तीज की कथा सुनें या पढ़ें.
- आरती: भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें.
- निर्जला व्रत: रात भर जागरण करें और भजन-कीर्तन करें.
- व्रत पारण: अगले दिन सुबह स्नान करने के बाद, पूजा-अर्चना करके और किसी ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देकर व्रत खोलें. व्रत खोलने के लिए पानी या फलाहार का सेवन करें.
राशि अनुसार करें हरितालिका तीज पर पूजा
वैसे तो हरितालिका तीज की पूजा सभी के लिए फलदायी है, लेकिन अपनी राशि के अनुसार पूजा करने से विशेष लाभ मिल सकता है.
- मेष राशि: लाल फूल और बेलपत्र चढ़ाएं.
- वृषभ राशि: सफेद चंदन और कमल का फूल अर्पित करें.
- मिथुन राशि: हरी दूब और धतूरा चढ़ाएं.
- कर्क राशि: सफेद फूल और गंगाजल से अभिषेक करें.
- सिंह राशि: आक के फूल और लाल कनेर चढ़ाएं.
- कन्या राशि: शमी के पत्ते और भांग चढ़ाएं.
- तुला राशि: इत्र लगे फूल और शंखपुष्पी चढ़ाएं.
- वृश्चिक राशि: लाल चंदन और लाल फूल अर्पित करें.
- धनु राशि: पीले फूल और केसर चढ़ाएं.
- मकर राशि: नीले फूल और काला तिल चढ़ाएं.
- कुंभ राशि: शमी के पत्ते और भांग चढ़ाएं.
- मीन राशि: चमेली के फूल और केसर चढ़ाएं.
इस तरह, 2026 में हरितालिका तीज का पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा. महिलाएं इस दिन विधि-विधान से पूजा करके अपने सुहाग की लंबी उम्र और परिवार की सुख-शांति की कामना कर सकती हैं.