बीसीसीआई की सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट से बाहर होने के बाद ईशान किशन और श्रेयस अय्यर का अगला कदम क्या होगा.
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने हाल ही में सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट जारी की है, और इस लिस्ट से ईशान किशन और श्रेयस अय्यर का नाम गायब होना क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गया है. दोनों ही युवा खिलाड़ी टीम इंडिया के अहम सदस्य रहे हैं, और ऐसे में इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सवाल यह है कि इस बड़े झटके के बाद ईशान किशन और श्रेयस अय्यर का अगला कदम क्या होगा. क्या वे घरेलू क्रिकेट पर ध्यान देंगे, रणजी ट्रॉफी खेलेंगे, या फिर अपने खेलने के तरीके में बदलाव लाएंगे? चलिए, इस पर विस्तार से बात करते हैं.
क्यों हुए बाहर? बीसीसीआई का क्या है स्टैंड.
बीसीसीआई के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर होने के पीछे का मुख्य कारण इन खिलाड़ियों का रणजी ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंट्स में हिस्सा न लेना बताया जा रहा है. बोर्ड का मानना है कि जो खिलाड़ी रणजी ट्रॉफी जैसे महत्वपूर्ण घरेलू टूर्नामेंट्स में नहीं खेलते, वे अपने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के बेस को मजबूत नहीं कर पाते. इससे उनकी परफॉरमेंस पर असर पड़ता है और वे इंटरनेशनल क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने से चूक जाते हैं.
बीसीसीआई सचिव जय शाह ने पहले ही इस बात के संकेत दिए थे कि जो खिलाड़ी रणजी ट्रॉफी नहीं खेलेंगे, उन्हें सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर रखा जा सकता है. उनका मानना है कि रणजी ट्रॉफी भारतीय क्रिकेट का आधार है और युवा खिलाड़ियों को इस टूर्नामेंट में खेलकर ही आगे बढ़ना चाहिए. ईशान किशन और श्रेयस अय्यर, दोनों ही रणजी ट्रॉफी के अहम मैचों के दौरान टीम इंडिया के कैंप में मौजूद थे या फिर उन्हें आराम दिया गया था, जिसके चलते वे अपनी राज्य की टीमों के लिए नहीं खेल पाए.
ईशान किशन का अगला कदम: वापसी की राह.
ईशान किशन, जो हाल के दिनों में टीम इंडिया के लिमिटेड ओवर्स फॉर्मेट में एक प्रमुख खिलाड़ी के तौर पर उभरे थे, उनके लिए यह एक बड़ा झटका है. दक्षिण अफ्रीका दौरे पर शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें शायद उम्मीद थी कि वे कॉन्ट्रैक्ट में बने रहेंगे. लेकिन रणजी ट्रॉफी न खेलना उनके लिए महंगा साबित हुआ.
- घरेलू क्रिकेट पर फोकस: अब ईशान किशन के लिए सबसे पहला और जरूरी कदम रणजी ट्रॉफी खेलना होगा. उन्हें अपनी राज्य की टीम, झारखंड, के लिए खेलना होगा और वहां अच्छा प्रदर्शन करना होगा. यह न सिर्फ बोर्ड को प्रभावित करेगा, बल्कि उन्हें अपनी लय वापस पाने में भी मदद करेगा.
- अपनी फिटनेस और फॉर्म पर काम: चोटों और फॉर्म में उतार-चढ़ाव के चलते वे कुछ समय से टीम से बाहर चल रहे थे. अब उनके पास अपनी फिटनेस और फॉर्म पर गहनता से काम करने का मौका है.
- डोमेस्टिक लीग्स में भागीदारी: रणजी ट्रॉफी के अलावा, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंट्स में भी उनका प्रदर्शन महत्वपूर्ण होगा. इन टूर्नामेंट्स में अच्छा खेलकर वे चयनकर्ताओं का ध्यान फिर से आकर्षित कर सकते हैं.
- मानसिक मजबूती: इस तरह के झटके के बाद मानसिक रूप से मजबूत रहना बहुत जरूरी है. ईशान किशन को इस स्थिति से सकारात्मक तरीके से बाहर निकलना होगा और वापसी के लिए खुद को तैयार करना होगा.
श्रेयस अय्यर का अगला कदम: खुद को साबित करने की चुनौती.
श्रेयस अय्यर, जो टेस्ट और वनडे फॉर्मेट में टीम इंडिया के मध्यक्रम की जान रहे हैं, उनके लिए भी यह कॉन्ट्रैक्ट से बाहर होना एक बड़ा सवाल है. हालांकि, वे चोट से उबरने के बाद वापसी कर रहे थे, लेकिन रणजी ट्रॉफी न खेलने का असर उन पर भी पड़ा है.
- रणजी ट्रॉफी में वापसी: श्रेयस अय्यर को भी मुंबई की टीम के लिए रणजी ट्रॉफी में उतरना होगा. उन्हें अपनी पुरानी फॉर्म में लौटना होगा और साबित करना होगा कि वे अभी भी टीम इंडिया के लिए एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं.
- टेस्ट फॉर्मेट पर विशेष ध्यान: श्रेयस अय्यर टेस्ट क्रिकेट में काफी सफल रहे हैं, लेकिन चोटों के चलते वे पिछला दौरा नहीं खेल पाए. अब उन्हें टेस्ट क्रिकेट में अपनी जगह पक्की करने के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा.
- फिटनेस पर निरंतरता: चोटों से जूझना उनके करियर में एक बड़ी बाधा रही है. उन्हें अपनी फिटनेस को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी ताकि वे किसी भी फॉर्मेट में खेलने के लिए हमेशा तैयार रहें.
- डोमेस्टिक सर्किट में अपनी छाप छोड़ना: रणजी ट्रॉफी के अलावा, अन्य प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट्स में भी उनका प्रदर्शन चयनकर्ताओं के लिए एक पैमाना होगा.
भविष्य की राह: क्या बदलेगा खेल का तरीका?
बीसीसीआई का यह फैसला भारतीय क्रिकेट में एक नई दिशा का संकेत देता है. यह साफ है कि बोर्ड अब उन खिलाड़ियों को प्राथमिकता देगा जो घरेलू क्रिकेट को महत्व देते हैं और अपनी फिटनेस पर ध्यान केंद्रित करते हैं.
- रणजी ट्रॉफी का महत्व बढ़ेगा: इस फैसले के बाद, यह तय है कि रणजी ट्रॉफी का महत्व और भी बढ़ जाएगा. युवा खिलाड़ियों को इस टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा.
- चयन का नया पैमाना: अब डोमेस्टिक क्रिकेट में प्रदर्शन सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट और टीम इंडिया में जगह पाने का एक महत्वपूर्ण पैमाना बनेगा.
- खिलाड़ियों को मिलेगा सबक: ईशान किशन और श्रेयस अय्यर जैसे खिलाड़ियों के लिए यह एक सबक है कि उन्हें सिर्फ इंटरनेशनल क्रिकेट पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करना है, बल्कि घरेलू ढांचे को भी मजबूत रखना है.
- अनुशासन और प्रतिबद्धता: यह फैसला भारतीय क्रिकेट में अनुशासन और प्रतिबद्धता के महत्व को भी दर्शाता है.
क्या हैं विकल्प?
अगर कोई खिलाड़ी सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में नहीं आता है, तो उसके पास कुछ विकल्प खुले होते हैं:
- घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन: यही सबसे सीधा और प्रभावी रास्ता है. रणजी, विजय हजारे और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर वे चयनकर्ताओं का ध्यान फिर से खींच सकते हैं.
- विदेशी लीग्स में खेलना: हालांकि, बीसीसीआई के नियमों के तहत, जब तक खिलाड़ी सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में हैं या भारतीय टीम का हिस्सा हैं, तब तक उन्हें बीसीसीआई की अनुमति के बिना विदेशी लीग्स में खेलने की इजाजत नहीं है. अगर वे कॉन्ट्रैक्ट से बाहर हैं, तो यह एक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसके लिए भी बीसीसीआई से अनुमति लेनी पड़ सकती है.
- फर्स्ट-क्लास क्रिकेट खेलना: ऐसे खिलाड़ी जो किसी कारणवश सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में नहीं आते, वे अन्य देशों की फर्स्ट-क्लास लीग्स में जाकर अनुभव प्राप्त कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए भी बीसीसीआई की एनओसी (No Objection Certificate) जरूरी होती है.
निष्कर्ष: वापसी की उम्मीद और नई राह.
ईशान किशन और श्रेयस अय्यर दोनों ही प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं और उनमें टीम इंडिया के लिए एक बार फिर वापसी करने की पूरी काबिलियत है. बीसीसीआई की सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट से बाहर होना निश्चित रूप से एक झटका है, लेकिन यह उनके लिए एक अवसर भी है. अगर वे अपने खेल, फिटनेस और घरेलू क्रिकेट के प्रति प्रतिबद्धता पर ध्यान देते हैं, तो वे निश्चित रूप से भारतीय क्रिकेट में अपनी जगह वापस पा सकते हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि ये दोनों युवा खिलाड़ी इस चुनौती का सामना कैसे करते हैं और उनका अगला कदम क्या होता है. क्रिकेट प्रेमियों को उम्मीद है कि वे जल्द ही मैदान पर शानदार वापसी करेंगे.